स्वेच्छाचारिता और लापरवाही पर सतना डाइट के प्राचार्य निलंबित

Satnafirst Desk
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Illustration of suspended word sign flat concept
सतना, 17 अप्रैल. कमिश्नर रीवा संभाग गोपालचंद्र डाड ने अपने पदीय कर्तव्यों के प्रति लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता बरतने के फलस्वरुप जिला प्रशिक्षण संस्थान सतना (डाइट) के प्राचार्य डॉ सच्चिदानंद पांडेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कलेक्टर अनुराग वर्मा ने स्वछंद कार्यशैली के फलस्वरुप डाइट प्राचार्य डॉ पांडेय को मौखिक रुप से कई बार समझाइस देने के बावजूद भी उनकी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं पाये जाने पर संबंधित के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही का प्रस्ताव कमिश्नर रीवा को भेजा था।
कमिश्नर रीवा ने कलेक्टर के प्रस्ताव के अनुसार डॉ सच्चिदानंद पांडेय का कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के विपरीत पाये जाने के कारण मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में डॉ पांडेय का मुख्यालय कार्यालय कलेक्टर जिला सतना नियत किया गया है। कमिश्नर रीवा संभाग द्वारा डाइट प्राचार्य डॉ पांडेय के निलंबन आदेश में कहा गया है कि प्राचार्य पद पदस्थ रहने के दौरान संस्थान में डीएलएड प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षणरत छात्र-छात्राओं के वार्षिक परीक्षा फॉर्म नहीं भराये जाने पर छात्रों में रोष व्याप्त है।
छात्र-छात्राओं ने बताया कि प्राचार्य द्वारा कम उपस्थिति का हवाला देकर परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित किया गया। जबकि विलंब शुल्क सहित वार्षिक परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 8 अप्रैल 2024 नियत रही है। प्राचार्य द्वारा पूर्व में कम उपस्थिति के बारे में न तो कोई लिखित या मौखिक रुप से सूचित किया गया। डाइट सतना में पदस्थ संस्थान के सेवानिवृत्त कर्मचारी साकेत कुमार गौतम और साधना खरे के अंतिम भुगतान के प्रकरण भी सेवानिवृत्ति के बाद भी 6 माह से 1 वर्ष की अवधि होने के बाद तक लंबित हैं। इसी प्रकार डाइट सतना में पदस्थ कर्मचारियों के अवकाश स्वीकृत के अभाव में वेतन रोकने, समयमान वेतन के सक्षम स्तर से स्वीकृत होने के उपरांत भी इसका लाभ नहीं देने से संस्थान के तीन व्याख्यता सहित दो लिपिक और दो भृत्य संवर्ग के कर्मचारी प्रताड़ित हो रहे हैं।
संस्थान के पूर्व कनिष्ठ व्याख्यता हरिशंकर चौरसिया को सतना से छतरपुर के लिये कार्यमुक्त होने के बाद भी उनका नोड्यूज प्रमाण पत्र, सेवा पुस्तिका, जीपीएफ, पासबुक, एवं कर्मचारी डाटा एलपीसी नहीं भेजने पर उन्हें चार माह से वेतन का भुगतान नहीं हो रहा है। डॉ पांडेय के इस कृत्य से संस्थान में सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के स्वत्वों का निराकरण समय पर नहीं करने और डीएलएड प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं के मुख्य परीक्षा में सम्मिलित नहीं होने से प्राचार्य डॉ पांडेय के खिलाफ रोष व्याप्त है तथा विभाग की छवि भी धूमिल हो रही है।
स्थानीय समाचार पत्रों में खबरे प्रकाशित होने और शिकायत प्राप्त होने पर कलेक्टर अनुराग वर्मा द्वारा कई बार डाइट प्राचार्य डॉ पांडेय को समझाइस देने के बावजूद उनकी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं हुआ। कमिश्नर रीवा संभाग ने इस आधार पर प्राचार्य डॉ पांडेय को सौंपे गये कर्तव्यों एवं दायित्वों के प्रति अनुशासनहीनता और उनके कृत्यों को कदाचरण की श्रेणी में मानते हुये तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
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