मीडिया में कांग्रेस की कमजोर पैरवी ने बढ़ाई चिंताएं

Satnafirst Desk
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मध्य प्रदेश में कांग्रेस की बड़ी कमजोरी मीडिया विभाग के प्रतिनिधियों की ओर से दमदार पैरवी न करना रही है। चाहे कमलनाथ के अध्यक्ष पद का दौर रहा हो या फिर अब जीतू पटवारी। कांग्रेस की ओर से कभी भी अपने प्रवक्ताओं को न तो ट्रेनिंग दी गई और न ही उन्हें बौद्धिक तौर पर मजबूत करने की कोशिश हुई। कुछ प्रवक्ता अपनी क्षमताओं के आधार पर चैनलों की डिबेट हो या फिर समाचार पत्रों में बयान जारी करना, इसमें सफल होते नजर आए मगर बहुसंख्यक वे लोग हैं जिनकी समझ पार्टी की मजबूती में मददगार साबित नहीं हो पा रही है। कांग्रेस के भीतर भी लगातार सवाल उठाते रहे हैं कि प्रवक्ताओं की और पैनलिस्टों की लंबी चौड़ी फौज तैयार कर दी है मगर वे अपना पक्ष रखने में कमजोर ही साबित हुए हैं। कुछ प्रवक्ता अपनी क्षमता के आधार पर डिबेट में पार्टी का मजबूती से पक्ष रखते नजर आते हैं तो वही कई प्रवक्ताओं की कमजोरी भी दिखती है। इतना ही नहीं पार्टी के कई अच्छे प्रवक्ता और पैरोंकार अब भाजपा का दामन थाम चुके हैं।

वर्तमान के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के सामने वह सशक्त टीम बनाने की चुनौती है जो मीडिया में पार्टी का दमदारी से पक्ष रख सके। पार्टी में तेज तर्रार प्रवक्ता के तौर पर के के मिश्रा, अब्बास हाफिज, फिरोज , मिथुन अहिरवार, संदीप सबलोक जैसे कुछ नेता है जिन्होंने अपना पक्ष रखने में हिचक नहीं दिखाई। चुनाव करीब है ऐसे में क्या जीतू पटवारी सशक्त प्रवक्ताओं की टीम तैयार कर पाएंगे या फिर अब तक जैसा होता आया है वैसा ही रहेगा।

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