किसानों से 31 मई तक होगा चना, मसूर और सरसों का उपार्जन

Satnafirst Desk
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सतना 13 मई. जिले के किसानों से रबी विपणन वर्ष 2023-24 में प्राइस सपोर्ट स्कीम के अंतर्गत चना, मसूर एवं सरसों की खरीदी निर्धारित उपार्जन केंद्रों पर की जा रही है। चना, मसूर और सरसों के उपार्जन का कार्य 31 मई तक जारी रहेगा।
उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने बताया कि शासन द्वारा चना 5 हजार 440 रुपये प्रति क्विंटल मसूर 6 हजार 425 रुपये प्रति क्विंटल एवं सरसों 5 हजार 650 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। शासन के निर्देशानुसार सभी उपार्जन केन्द्रों पर किसानों की सुविधा को देखते हुये शुद्ध पेयजल, छायादार बैठने के स्थान, सुगम परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया है कि वे उपार्जन केन्द्रों या कियोस्क अथवा स्वयं द्वारा अपनी सुविधानुसार स्लॉट बुक कर अपनी उपज का विक्रय शासकीय उपार्जन केन्द्रों पर करें।

तुअर, उड़द, चना, मूंग, मसूर का पोर्टल में घोषित करना होगा स्टॉक

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भारत सरकार द्वारा पांच प्रमुख दालों तुअर, उड़द, चना, मसूर और मूंग की बाजार में सुचारु उपलब्धता तथा स्टॉक की स्थिति पर निगरानी रखने और जमाखोरी को नियंत्रित करने के लिये ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया गया है। इस स्टॉक प्रकटीकरण पोर्टल में प्रति शुक्रवार खाद्य व्यापारियों को दालों के स्टॉक की घोषणा करनी होगी। व्यापारियों द्वारा दालों के स्टॉक की जानकारी उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की वेबसाइट https://fcainfoweb.nic.in/psp/ पर की जायेगी।

कलेक्टर अनुराग वर्मा ने आदेश के पालन में खाद्य सुरक्षा विभाग और कृषि उपज मंडी के अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि जिले के समस्त पंजीकृत व्यापारियों से भारत सरकार के पोर्टल में तुअर, उड़द, चना, मसूर और मूंग के स्टॉक की घोषणा नियमित रुप से दर्ज कराना सुनिश्चित करायें।

किसानो को रोपा पद्धति की बजाय धान की सीधी बुवाई की सलाह

कम लागत में धान की फसल प्राप्त करने के लिये किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने किसानो को उपयोगी सलाह दी है। कृषकों को रोपा पद्धति के बजाय डीएसआर पद्धति (डायरेक्ट सीडिड राईस) अर्थात सीधे बुवाई कर धान की फसल लगाने की सलाह दी गई है। डीएसआर पद्धति से धान की बुवाई करने से लागत में कमी आती है और मजदूरी कम लगती है। साथ ही जल संरक्षण भी होता है। इस पद्धति से धान लगाने से समय पर बुवाई हो जाती है और रबी की फसल की बोनी भी समय से हो जाती है।
उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास ने जिले के किसानो से डीएसआर पद्धति से अधिक से अधिक रकबे में धान की बुवाई करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि धान की बुवाई डीएसआर सीडड्रिल या जीरोटिलेज सीडड्रिल से की जा सकती है। यह सीडड्रिल उपलब्ध न होने पर सामान्य सीडड्रिल में ही फ्लूटेड रोलर पर्याप्त स्थिति में खोलकर उपयोग किया जा सकता है। इससे धान की बीज टूटने से बच जाता है। साथ ही बीज के साथ डीएपी का मिश्रण भी किया जा सकता है।
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