वेंकट विजय, भोपाल. 29 मार्च.
अशोक नगर जिले में स्थित करीला माता मंदिर में माता जानकी अपने पुत्र लवकुश जी के साथ विराजमान है. साथ में महर्षि वाल्मीकि जी भी विराजमान हैं. रंगपंचमी पर करीला धाम में आयोजित मेले में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र सहित देशभर से लाखों श्रद्धालु करीला पहुंचते हैं. तथा माता जानकी जी मंदिर में दर्शन करते हैं. इस दौरान वर्ष में एक बार खुलने वाली गुफा के दर्शन भी होते है. प्रसिद्ध करीला के माता जानकी दरबार में मन्नतें पूर्ण होने पर श्रद्धालु राई कराते हैं.
रंगपंचमी पर रातभर देश के कई हिस्सों से आई नृत्यांगनाओं द्वारा राई की प्रस्तुति दी जावेगी. करीला धाम अशोकनगर एवं विदिशा जिले की सीमा पर स्थित है. यहां पर पहाड़ियों पर माता जानकी जी का पावन दरबार है. यह दरबार बर्षो से लोगों की आस्था एवं विश्वास का केन्द्र है. इस दरबार में देश के विभिन्न हिस्सों से लोग आकर अपनी मनोकामनाऐं करते है.
माँ जानकी मंदिर करीला धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष महेन्द्र सिंह यादव रुसल्ला बताते हैं कि ऐसी मान्यता हैं कि प्रसिद्व करीला धाम में ही माता जानकी जी वनवास के समय रही थी तथा करीला में ही महर्षि वाल्मिकी आश्रम में लवकुश का जन्म हुआ था. माता जानकी से जुड़े इस कथानक के ऐतिहासिक प्रमाण तो नही हैं. इस बार भी करीला में रंगपंचमी मेले में देशभर से करीब 20 से 25 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है.
वर्ष में एक बार खुलती है गुफा
यहां पर एक गुफा भी है. जो वर्ष में एक बार रंगपंचमी पर खोली जाती है. यह गुफा माता जानकी जी के मंदिर के पास में ही हैं. जो वर्ष में एक बार रंगपंचमी पर 24 घंटे के लिये खोली जाती है. इस बार 30 मार्च शनिवार को सुबह 7 बजे यह गुफा खोली जावेगी. जो करीब 24 घंटे तक 31 मार्च को सुबह 7 बजे तक खुली रहेगी. करीला धाम में रंगपंचमी मेले को लेकर इस बार भी व्यापक तैयारियां की गई है.
