सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा में वृद्धि बेरोजगारों के साथ क्रूर मज़ाक 

Satnafirst Desk
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  • सेवानिवृत्ति पर कर्मचारियों को पेंशन पर बेरोजगार तो दर-दर भटक रहे ; अजय खरे
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रीवा 2 फरवरी। प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा मे फिर से वृद्धि के संभावित निर्णय को लेकर शिक्षित बेरोजगार पीढ़ी में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। यह प्रदेश के लाखों बेरोजगारों के साथ क्रूर मजाक है। वर्ष 1998 में दिग्विजय सरकार ने शासकीय कर्मचारियों की 58 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु सीमा को बढ़ाकर 60 वर्ष कर दिया था। इसके बाद शिवराज सरकार ने वर्ष 2018 में इसे बढ़ाकर 62 वर्ष कर दिया। इसके चलते बड़े पैमाने पर लंबे समय से प्रदेश के शिक्षित नौजवानों को रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है। सरकार द्वारा स्थाई नियुक्ति देने की जगह बेरोजगारों को सीमित संख्या में संविदा पर रखा गया है , जहां लंबे समय काम करने के बाद भी उनका भविष्य अंधकारमय है। इस तरह की संविदा नियुक्ति शिक्षित बेरोजगारों का शोषण है जिसमें उन्हें कम मानदेय देकर पूरा काम लिया जाता है। बड़ी संख्या में शिक्षित बेरोजगार ओवर ऐज हो गए हैं। नौकरी के लिए आयु सीमा में कई बार वृद्धि की गई लेकिन सरकार बेरोजगारों को रोजगार नहीं दे पा रही है।

समता संपर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक अजय खरे ने कहा है कि सरकारी कर्मचारियों को 26 वर्ष पहले 58 वर्ष की आयु पर सेवानिवृत्ति कर दिया जाता था। आपातकाल में तो 55 वर्ष की आयु में अनिवार्य सेवा निवृत्ति लागू कर दी गई थी। आमतौर पर कर्मचारियों की कार्य क्षमता के हिसाब से 58 वर्ष आयु सीमा सही है लेकिन शासकीय कर्मचारियों का चुनावी फायदा लेने के लिए उनकी आयु सीमा में निरंतर वृद्धि हो रही है। वृद्धावस्था में कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति होने पर पेंशन प्रावधान है जबकि युवा पीढ़ी के जीविकोपार्जन के लिए किसी तरह की व्यवस्था नहीं है। अच्छी खासी पढ़ाई करने के बाद भी लाखों की संख्या में युवा पीढ़ी रोजगार के लिए इधर उधर भटक रही है। यह स्थिति विस्फोटक न बने इसके लिए सरकार को वैकल्पिक रोजगार की नीति बनानी होगी वहीं कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा में की जा रही वृद्धि को भी रोकना होगा।

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