– राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सीएम यादव और विजयवर्गीय के बयान का विरोध.
भोपाल. 12 फरवरी. मध्यप्रदेश विधानसभा में सोमवार को दोपहर के बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान भारत रत्न और ट्ंटया को लेकर सीएम डॉ. मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान के दौरान कांग्रेसियों ने जमकर हंगामा किया. बयान के दौरान दोनों नेताओं के उल्लेखित शब्दों को लेकर कांग्रेसियों ने सदन से वाकआउट कर दिया.
विवाद की शुरुआत उस समय हई, जब सीएम यादव ने कहा कि कांग्रेस ने जिन पर कभी ध्यान नहीं दिया, हम उन्हें भारत रत्न दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने बिहार के सर्वहारा वर्ग के बड़े नेता कर्पूरी ठाकुर, लालकृष्ण आडवाणी, चौधरी चरण सिंह, डॉ स्वामीनाथन और नरसिम्हा राव को भारत रत्न का सम्मान दिया है, जिनके लिए कांग्रेस पार्टी ने कोई ध्यान नहीं दिया. इस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार बीच में बोल पड़े – भारत रत्न एक बहुत बड़ा गौरवशाली सम्मान है, जो भारत के संविधान में उल्लेखित है, लेकिन आपने एक साल में 5- 6 एक साथ बांट दिए.
उमंग के बयान पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया, जिस पर अध्यक्ष ने व्यवस्था देते हुए कहा कि भारत रत्न भारतवर्ष का सर्वोच्च सम्मान है, इस पर कोई टिप्पणी नहीं करें, जो शब्द आए हैं, उनको विलोपित कर देते हैं. सीएम यादव ने कहा कि हमारा संकल्प पत्र, कोई कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि धर्म ग्रंथ की तरह है, जिसे हम निश्चित रूप से पूरा करेंगे.
ये रहा घटनाक्रम
विधानसभा में सीएम यादव ने कहा- कांग्रेस ने टंट्या मामा की उपेक्षा की है. टंट्या मामा को सालों तक शिक्षा नीति में किस नाम से जाना जाता है. इसका कोई उल्लेख नहीं किया. उनके अपमान का अगर कोई जिम्मेदार है, तो वह कांग्रेस पार्टी है. वही संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस ने गुरु गोविंद सिंह और टंट्या मामा भील को लुटेरा कहा. इतिहास के पन्नों में जितना महापुरुषों का अपमान कांग्रेस ने किया, कांग्रेस को शर्म आना चाहिए. उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी की किताबों में साफ तौर पर लुटेरा लिखा था, उसे मुरली मनोहर जोशी ने ठीक करने का काम किया था.
यह सुनते ही विपक्ष ने जमकर हंगामा किया. विजयवर्गीय से शब्द विलोपित करने की मांग करते हुए सदन से कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट कर दिया. इस दौरान अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इस विषय पर कांग्रेस के लोगों को आपत्ति है. चूंकि सदस्यों ने एनसीईआरटी की किताबों का हवाला दिया हैं, चूंकि अभी मेरे सामने किताब नहीं है. इसलिए मैं किताब देखने के बाद कुछ निर्णय ले पाऊंगा. इस मामले पर रामनिवास रावत और नरेंद्र सिंह कुशवाह के बीच विवाद की स्थिति बनी, जिस पर अध्यक्ष ने हस्तक्षेप किया.
आखिर कांग्रेसियों को मिला मौका
विधानसभा सत्र शुरू होने के बाद से कांग्रेस लगातार आक्रामक रूख अपनाए हुए हैं. पहले तीन दिन हरदा की घटना को लेकर सदन में हंगामा मचाया, जिससे सदन को स्थगित करनी पड़ी. सोमवार को भी विधानसभा के पहले पाली में कांग्रेस विधायक बजट को लेकर हंगामा मचाने की कोशिश की, जब सफल नहीं हो सकें, तो राज्यपाल के अभिभाषण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सीएम यादव और कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर कांग्रेसियों को मौका मिल गया. इसके बाद हंगामा मचाते हुए विपक्षी विधायक सदन को छोड़कर बाहर आ गए.
