बरेठी में सौर ऊर्जा परियोजना की आधारशिला रखी

Satnafirst Desk
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छतरपुर .केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने रविवार को छतरपुर जिले के सटई तहसील अंतर्गत ग्राम बरेठी में सौर ऊर्जा परियोजना की आधारशिला रखी। इस अवसर पर वर्चुअली रूप से केंद्रीय विद्युत नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर.के. सिंह भी शामिल हुए। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक राजेश शुक्ला, राजनगर विधायक अरविंद पटेरिया, छतरपुर विधायक ललिता यादव, एडीएम नमः शिवाय अरजरिया, चंद्रभान सिंह गौतम, पुष्पेंद्र प्रताप सिंह सहित परियोजना से जुड़े अधिकारीगण उपस्थित रहे।
केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा की बरेठी सोलर पावर प्रोजेक्ट के स्थापित होने से लोगों को सस्ती बिजली उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने कहा जिन ग्रामों में भारत की आज़ादी के बाद बिजली नहीं थी वहां 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिजली पहुंची। उन्होंने कहा सौभाग्य योजना, उजाला योजना, एलईडी योजना से गरीब की बिजली का बिल कम करना समाज जीवन में प्रधानमंत्री के कार्य को देश नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा बुंदेलखंड लगातार उन्नति की ओर अग्रसर हो रहा है। छतरपुर जिले के लिए सौभाग्य की बात है की खजुराहो से दिल्ली के लिए सर्वसुविधा युक्त वंदे भारत ट्रेन निकलेगी। जो बुंदेलखंड के क्षेत्र से होकर गुजरेगी। उन्होंने कहा अमृत भारत आदर्श योजना में छतरपुर की हरपालपुर और छतरपुर रेलवे स्टेशन को शामिल किया गया है। छतरपुर स्टेशन परिसर में महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा को स्थापित किया जाएगा। केन्द्र सरकार द्वारा केन बेतवा लिंक परियोजना को मंजूरी दी गई है। जो शीघ्र शुरू होगी। इसके साथ हो मेडिकल कॉलेज का कार्य भी जारी है और जिला आकांक्षी जिले में शामिल है। उन्होंने कहा सभी बाधाओं को दूर करके सोलर पावर प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया गया। आने वाले समय में सोलर एनर्जी का ऊर्जा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभियान को बढ़ाने की दिशा में हमारे छतरपुर जिले के योगदान रहेगा।

मध्य प्रदेश में छतरपुर जिले के बरेठी नवीकरणीय ऊर्जा पार्क स्थित 630 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना में 3200 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। इस परियोजना के पूरा होने पर 3 लाख से अधिक घरों को पर्याप्त बिजली मिलेगी। इसे यूएमआरईपीपी मोड-8 के अधीन एमएनआरई नवीकरणीय ऊर्जा पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है। सतत बिजली उत्पादन की दिशा में बढ़ते इस कदम से यह परियोजना सालाना 12 लाख टन सीओ2 उत्सर्जन को कम करेगी, जिससे देश की जलवायु प्रतिबद्धताओं और हरित ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इस परियोजना के चालू होने से न केवल ग्रिड को हरित बिजली की आपूर्ति होगी, बल्कि लाभार्थियों के लिए सस्ती बिजली भी सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही क्षेत्र में परियोजना के निर्माण से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने में मदद मिलेगी।

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