मानवाधिकार आयोग ने वृद्धाश्रम का किया निरीक्षण

Satnafirst Desk
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 सतना 3 मई. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्पेशल मॉनीटर श्री बालकृष्ण गोयल ने गुरुवार को अपने मैहर जिले के प्रवास के दूसरे दिन मां शारदा मंदिर मैहर द्वारा संचालित वृद्धाश्रम का निरीक्षण किया। गोयल ने आश्रम संचालक और कर्मचारियों से कहा कि वृद्धाश्रम में रहने वाला हर बुजुर्ग हमारे माता-पिता के समान है। उन्होने आश्रम से संबंधित शिकायतो को साझा करने वृद्धजनों के लिये अपना व्यक्तिगत फोन नंबर आश्रम की दीवाल पर अंकित करवाया।
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स्पेशल मॉनीटर श्री गोयल ने आश्रम के प्रभारी को कार्यरत सभी कर्मचारियों की मेडिकल जांच और पुलिस वेरिफिकेशन कराने के लिये कहा। साथ ही वृद्धजनों को हर माह मैहर के आस-पास तीर्थ दर्शन कराने का सुझाव दिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी मैहर को वृद्धाश्रम के वृद्धजनों की स्वास्थ्य जांच के लिये मेडीकल कैंप लगाने और निरीक्षण में पाई गई कमियों को सुधारने की भी बात कही। इस दौरान तहसीलदार मैहर जितेंद्र पटेल, सीएमओ लालजी ताम्रकार, इंजी एसबी सिंह मौजूद रहे।

मातृछाया और केंद्रीय जेल सतना का भी किया निरीक्षण

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के स्पेशल मानीटर श्री बालकृष्ण गोयल ने अपने मैहर जिले के दो दिवसीय प्रवास उपरांत सतना जिले की संस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने मातृछाया शिशु गृह और केंद्रीय जेल का निरीक्षण किया। मातृछाया शिशु गृह के संचालक से बच्चों की दी जा रही सुविधायें, दत्तक ग्रहण प्रक्रिया और संस्था संचालन के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

उन्होने संस्था में कार्यरत स्टाफ की कार्यशैली और बच्चों के साथ उनके व्यवहार के बारे में भी जानकारी ली। स्पेशल मानीटर श्री गोयल ने मातृछाया के निरीक्षण के उपरांत केंद्रीय जेल सतना का भी निरीक्षण किया। उन्होने जेल के महिला वार्ड का निरीक्षण करते हुये महिला कैदियों से उनके स्वास्थय और जेल से मिल रहीं सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।

गोयल ने जेल की पाकशाला का निरीक्षण कर कैदियों के लिये बनाये जा रहे भोजन की प्रक्रिया का अवलोकन किया और भोजन चखकर उसकी गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त किया। इसके उपरांत जेल की लाइब्रेरी का भी निरीक्षण किया। उन्होने जेल के अधिकारियों से कहा कि जो भी कैदी जेल में रहते हुये अपनी पढ़ाई जारी रखे हुये हैं, उन्हे आवश्यक सहयोग करें।

गोयल ने जेल भ्रमण के दौरान कैदियों से भी बातचीत की। उन्होने कैदियों से कहा कि जो भी कैदी आर्थिक रुप से सशक्त नहीं हैं और प्राइवेट वकील का खर्च नहीं उठा सकते हैं। ऐसे कैदी शासन की योजना का लाभ लें, विधिक सहायता के लिये शासकीय वकीलों से अपनी पैरवी करवा सकते हैं।

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