– सहिजना उबारी में जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन.
सतना 16 जून. जल ही जीवन का आधार है, आज कम सभी जलवायु परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं। अगर समय रहते इसके संरक्षण और संवर्धन के सम्मिलित प्रयास नहीं किये गये तो आने वाले समय में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जल स्त्रोतों के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन के लिये प्रदेश सरकार द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया गया। यह अभियान आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित और संरक्षित करने का जन आंदोलन है। सांसद गणेश सिंह रविवार को उचेहरा विकासखंड के ग्राम सहिजना उबारी में जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष रामखेलावन कोल, जनपद अध्यक्ष अंजू सिंह, जिला पंचायत सदस्य ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू, एकता अनूप सिंह, मंजूलता सिंह, डॉ पंकज सिंह परिहार, विधायक प्रतिनिधि भागवेंद्र सिंह, सीईओ जिला पंचायत संजना जैन, एसडीएम सुधीर बैक, ईई आरईएस अश्वनी जायसवाल, सरपंच श्याम सिंह सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। सांसद गणेश सिंह ने कहा कि प्रकृति और जीवन का वैंसा ही संबंध है, जैंसे संतान का और मां का। यदि हम प्रकृति और नदियों की उपेक्षा करेंगे तो हमारा जीवन भी निर्जल होगा। हमें अपने जीवन के लिए नदियों को अविरल और पवित्र रखना होगा।
उन्होने कहा कि जिस प्रकार से आज प्रकृति के संसाधनों का दोहन हो रहा है और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों के जागरुकता की कमी दिख रही है। जलवायु परिवर्तन के कुछ प्रभावों को वर्तमान में भी महसूस किया जा सकता है। आने वाला समय हम सभी के लिये सुखद हो इसके लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान चलाकर आमजनता में जल संरक्षण की अलख जगाई है। मुख्यमंत्री द्वारा शुरु किया गया जल गंगा संवर्धन अभियान जल संरचानओं को पुनर्जीवित करने के महाअभियान के साथ-साथ जन आंदोलन भी है। इस अवसर पर सांसद श्री सिंह ने सभी को जल स्त्रोत के संरक्षण और संवर्धन की शपथ दिलाई। सांसद श्री सिंह ने जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के साथ नदी की सफाई के लिये श्रमदान भी किया।
प्रत्येक परिवार कम से कम पांच पेड़ लगाये
जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन अवसर पर सांसद गणेश सिंह ने बरगद का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। किया। उन्होने कहा कि प्रकृति संरक्षण के लिये प्रत्येक परिवार कम से कम पांच पेड़ जरुर लगायें। जीवन के विशेष अवसरों, अपने परिजनों और पूर्वजों की याद में पेड़ लगाये। जल स्त्रोंतो के पास अधिक जल अवशोषित करने वाले पौधे नहीं लगाना चाहिए, बल्कि जल उत्सर्जित करने वाले पौधों का रोपण करना चाहिए। इससे हमारे जल स्रोत जीवित रहेंगे।
