अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा और शबरी ने किया चित्रकूट की मंदाकिनी में दीपदान

Satnafirst Desk
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चित्रकूट । अयोध्या मे रामलला की प्राणप्रतिष्ठा से प्रभु राम की तपोभूमि चित्रकूट भी उत्सव के रंग में डूबा रहा। यहां हजारों जनजातीय महिलाओं ने कामदगिरि की परिक्रमा की और मंदाकिनी नदी में दीपदान किया। सामाजिक कार्यकर्ता डा स्वप्ना वर्मा की अगुवाई में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान के चलते मंदाकिनी नदी रौशनी से जगमगा उठी।
एक तरफ अयोध्या राममय थी तो दूसरी ओर राम के वनवास की गवाह चित्रकूट नगरी भी राम के जयकारों से गूॅज रही थी। हर कोई राम के रंग में रंगा था। कामदगिरी का परिक्रमा पथ तो राम की भक्ति के रस में डूबा रहा। समाजसेवी और मधुरिमा सेवा संस्कार फाउंडेशन की संस्थापक डा स्वप्ना वर्मा ने सपरिवार कामतानाथ की पूजा की। उसके बाद हजारों जनजातीय वर्ग की महिलाओं के साथ कामदगिरी की परिक्रमा की।
समाजसेवी डाॅ स्वप्ना वर्मा ने बताया कि भगवान राम ने अपने वनवास का अधिकांश समय चित्रकूट में ही व्यतीत किया था। इसलिए अयोध्या में नव्य-भव्य राम मंदिर में विराजमान भगवान रामलला के नूतन विग्रह के प्राणवान होने से सतना के लोगों में उमंग का वातावरण है।
उन्होंने कहा कि आज संपूर्ण देश राममय है क्योंकि हिंदू समाज के 500 वर्षों के संघर्ष के बाद प्रभु श्रीराम अपनी जन्मभूमि अयोध्याधाम में बने नव्य एवं भव्य मंदिर में पधारे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह आत्मगौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि अयोध्याधाम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देशवासियों को जो संदेश दिया है, उससे भारत में रामराज्य का सपना साकार होगा।
कामदगिरि परिक्रमा में भारी तादाद में लोगों ने हिस्सा लिया। परिक्रमा के बाद जनजातीय महिलाओं के साथ डाॅ स्वप्ना ने भी मंदाकिनी नदी में दीपदान किया। इस मौके पर वहां जब दीप कम पड़ गए तो स्थानीय महिलाओं ने अपने-अपने घरों से मिट्टी के दीये लाए और सबने मंदाकिनी नदी के पावन जल में दीपदान कर मन्नते मांगी। भगवान राम ने वनवास की 12 वर्ष से अधिक की अवधि को चित्रकूट में व्यतीत किया था। इस दौरान भगवान राम, सीता और लक्ष्मण मंदाकिनी नदी में स्नान और पूर्जा-अर्चना करते थे, जिनके अवशेष यहां आज भी मौजूद हैं।

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